पादपों में अस्थायी और स्थायी मुरझाना (wilting) देखा जाता है। दोनों के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।

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(N/A) मुरझाना का अर्थ है पादप की पत्तियों और तनों में स्फीति (turgidity) का खो जाना, जिससे वायवीय अंग झुक जाते हैं या मुड़ जाते हैं। यह तब होता है जब वाष्पोत्सर्जन की दर जल अवशोषण की दर से अधिक हो जाती है।
अस्थायी मुरझाना स्थायी मुरझाना
$(i)$ यह दोपहर के समय होता है जब वाष्पोत्सर्जन की दर अधिक होती है। $(i)$ यह तब होता है जब मृदा में नमी की मात्रा स्थायी मुरझाने के प्रतिशत से नीचे गिर जाती है।
$(ii)$ वाष्पोत्सर्जन की दर अवशोषण की दर से अधिक होने के कारण अस्थायी असंतुलन पैदा होता है। $(ii)$ मृदा में पानी की गंभीर और लंबी अवधि की कमी के कारण होता है।
$(iii)$ जब मृदा में पानी डाला जाता है या वाष्पोत्सर्जन कम हो जाता है, तो पादप अपनी स्फीति पुनः प्राप्त कर लेता है। $(iii)$ मृदा में पानी डालने पर भी पादप अपनी मूल स्थिति प्राप्त नहीं कर पाता है।
$(iv)$ पादप स्वस्थ होने के बाद सामान्य वृद्धि जारी रखता है। $(iv)$ अंततः पादप की मृत्यु हो जाती है।

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